क्या करोगी ?


जानता हूँ ,

ऐसा कभी नहीं होगा

फ़िर भी ---

वक्त का क्या ठिकाना ?

कभी ऐसा हो

कि

मैं

गुम हो जाऊँ ---

सुबह का निकला

शाम , रात , अगले दिन

और फ़िर

कई अगले दिनों तक

वापस न आऊँ /

तब तुम क्या करोगी ?

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